Sant Shiromani Paramhans Lakshmi Nath Goswamiसंत शिरोमणि परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी

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साधित सिद्धियाँ

योग साधना में स्वामी जी की साधित सिध्दियाँ

  1. परमाणु का ज्ञान - सुक्ष्मतम पदार्थ को परमाणु कहते हैं । स्वार्थ का अर्थ प्रकृति और परार्थ का अर्थ पुरूष होता है । जब बुध्दि पूर्णतः शुध्द एवं निर्मल रहती है, उस अवस्था को सात्विक स्वार्थ कहते हैं । ध्यान, धारणा एवं समाधि को संयम कहते हैं । "स्वार्थ" में संयम करने से परमाणु का ज्ञान होता है ।
  2. असीम बल की प्राप्ति - बल समुह में संयम । ध्यान, धारणा एवं समाधि करने से असीम बल की प्राप्ति होती है ।
  3. दृष्टि स्तम्भन -कायाकृति में संयम करने से दृष्टि स्तम्भन शक्ति की प्राप्ति होती है । अंत्रध्यान (तिरोहित) होने में योगी जन इसी सिध्दि का प्रयोग करते है । द्रष्टा की आँखों परदा पड जाता है ।
  4. मरण तिथि क ज्ञान - आगत एवं अनागत कर्मो में संयम करने से यह शक्ति प्राप्त होती है ।
  5. आगम्य शक्ति की प्राप्ति - कण्ठ स्थित उदान वायु में संयम करने से यह शक्ति प्राप्त होती है । आगम्य शक्ति से संयम करने से सम्पंना योगी कीचड काँटे, खाई इत्यादि स्थानों में सुगमता से गमन करते हं ।
  6. अति हल्का बनने का सधना - जहाँ काया और आकाश का सम्बंध है, वहाँ संयम करने से रूई सा हल्का बनने की शक्ति प्राप्त होती है ।
  7. इंद्रिय निग्रह - ग्रहण, स्वरूप, अस्मिता, अंवय और अथ पर संयम करने से इंद्रियों पर विजय प्राप्त होती है ।
  8. सवर्ग्यता की सिध्दि - चित और पुरूष (चेतनता) पर संयम करने से सवर्ग्यता की सिध्दि होती है।
  9. पंच भूतो - पृथ्वी, जल, पावक, पवन और आकश के स्थुल, स्वरूप अंवय तथा अर्थव में संयम करने से संयम करने से भुतो पर विजय प्राप्त होती है ।

उपर्युक्त सिध्दियों के बाद ही, स्वामी जी को निम्नलिखित अष्ट सिध्दियो की प्राप्ति हुई ।

  1. अणिमा - अणु से अणु रूप का धारण करना ।
  2. महिमा - महान से महान रूप का धारण करना ।
  3. गरिमा - अत्यंत भारी होना ।
  4. लधिमा - अत्यंत हल्का रूप धारण करना ।
  5. प्राप्ति - इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति ।
  6. प्राकाम्या - मनोकामना की पूर्ति ।
  7. वशीतव - सम्पूर्ण पंच भूतों को वश में करना ।
  8. ईशित्व - उत्पंन, पालन और नाश की शक्ति प्राप्त करना ।